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भारत के लिए चर्चा का प्लेटफॉर्म : ‘मंच’ ऐप में हमारा निवेश

By , and on January 23, 2019

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भारत एक विचारशील समाज है, जिसमें वाद-विवाद एवं तर्क की बहुत महत्ता है । चाहे वह मोदीजी की चाय पे चर्चा हो, कोलकाता का प्रसिद्ध अड्डा, दोस्त की शादी या चाय की टपरी – हम भारतीय हर जगह बहस करते पाए जा सकते हैं | इंटरनेट (Internet) की दुनिया में भारतीयों की यह आदत ‘क्वोरा’ (Quora) पर साफ़ दिखाई देती है, जहाँ भारतीय सबसे बड़े एक्टिव ग्रुपों में से एक हैं। परन्तु अन्य सोशल मीडिया वेबसाईटस (जैसे की फेसबुक, यूट्यूब इत्यादि) पर भारतीयों का यह स्वभाव उभर कर नहीं आता| इन साइट्स पर 25 करोड़ से ज्यादा भारतीय मौजूद तो हैं, किंतु इनमें से लिखने/ पोस्ट करने वालों की संख्या काफी कम है ।

इसके चलते एक सवाल सामने आता है – “किसी भी माहौल में वे क्या चीज़ें होती हैं जो हमें अपनी सोच को आसानी से व्यक्त करने में मदद करती हैं ?”

सूरत, अजमेर, जयपुर इत्यादि के सौ से अधिक इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों से बात करके हमने जाना कि उनके लिए वॉट्सऐप (WhatsApp), यूट्यूब (YouTube) एवं फेसबुक (Facebook) ही इंटरनेट की परिभाषा है। ऑफ-लाइन दुनिया में ये लोग हर विषय, चाहे राजनीति, टीवी सीरियल या शादियाँ इत्यादि, पर चर्चा करते हैं; परन्तु ऐसा कोई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म नहीं है जिसमे ये ऐसी चर्चा कर सकें । पिछले कुछ सालों में हमने ऐसे अनेक मोबाइल ऍप्स का प्रचलन देखा है जो क्षेत्रीय भाषाओं में मनोरंजन उपलब्ध कराती हैं । परन्तु इन इंटरनेट उपभोक्ताओं के लिए आज भी एक ऐसे प्लेटफॉर्म की आवश्यकता है जहाँ वे अपनी भाषा में आसानी से खुद को व्यक्त कर सकें और अलग-अलग विषयों पर चर्चा कर सकें |

विश्वीय स्तर पर, रैड्डीट (Reddit) और टवीटर (Twitter) ऐसे प्लेटफॉर्म्स का उदाहरण हैं जिनमे अलग-अलग विषयों के आधार पर चर्चा की जाती है । अगर हम चीन पर नज़र डालें, तो वहां व्यवहार कुछ अलग है – नागरिकों की गतिविधियों पर सरकार कि कड़ी नज़र व ऑफ-लाइन/ऑनलाइन ग्रुप्स पर अंकुश के कारण, चर्चा वाले प्लेटफॉर्म्स (discussion oriented platforms) को मुश्किलों का सामना करना पड़ा | किंतु सरकार की सख़्ती के बावजूद वीबो (Weibo – Q&A platform) और ज़हीहू (zhihu – micro blogging platform) ने बातचीत के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने में कुछ हद तक सफलता प्राप्त की है। साथ ही, अलग-अलग विषयों पर चर्चा करने के लिए, चीनी निवासी किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर न होकर, विभिन्न कंटेंट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं | उदाहरण के लिए, टीवी सीरियल में दिलचस्पी रखने वाले चीनी उपभोक्ता, रैड्डीट (Reddit) के बजाय, आइकी (iQiyi – netflix of china) पर ही चर्चा कर लेते हैं ।

भारत और चीन मैं कुछ मौलिक अंतर हैं – भारत में अनेक क्षेत्रीय भाषाओं का चलन है, वाद-विवाद की संस्कृति है और इंटरनेट पर कोई रोकटोक नहीं है | इसीलिए हमें लगता है कि भारत में विभिन्न विषयों के समुदाय और खुली चर्चाओं के लिए एक प्लेटफॉर्म बनाने का अवसर है। हमारे विचार में , क्षेत्रीय उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर बनाये गए प्लेटफॉर्म विश्वीय प्लेटफॉर्मों से कहीं ज्यादा पॉपुलर हो सकते हैं |

एक वार्तालाप के तीन तत्व होते हैं – भाषा, विषय और भागीदार। अपनी राय प्रकट करने के लिए आपको एक जाने पह्चाने माहौल की ज़रूरत होती है | यह अपनापन आम तौर पर आपकी भाषा, विषय में आपकी रूचि और सहभागियों के साथ आपके तालमेल पर निर्भर करता है । प्रीतम रॉय और हरी कृष्णा द्वारा निर्मित ”मंच” ऍप इसी अपनेपन की ओर एक प्रयास है |

कुछ महीने पहले जब हम प्रीतम से मिले तब वह भारत के कई छोटे शहरों की तीन-माह की यात्रा से वापस आये थे | उनकी यात्रा से दिलचस्प निष्कर्ष सामने आया – “भाषा ‘भारत’ को इंटरनेट में भाग लेने से रोकने वाली अकेली बाधा नहीं है । “मंच” ऐप पर लोग अपनी रूचि के विषयों पर राय व्यक्त कर सकते हैं । चाहे वह क्षेत्रीय चुनावों पर चर्चा हो या त्योहारों की मान्यताएँ या बिग बॉस के प्रतिभागियों की आपस की साजिश । अपनी पसंदीदा भाषा का प्रयोग करके और समान विचारधारा वाले लोगों के ग्रुप्स बनाकर, उपयोगकर्ता ऐसे मंच पर सहज महसूस कर पाएंगे । भारत के छोटे शहरों में पले-बढ़े होने के कारण प्रीतम और हरी के लिए यह निष्कर्ष स्वाभाविक थे |

प्रीतम आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग ग्रैजुएट हैं और पहले भी अपना स्टार्ट-अप शुरू कर चुके हैं | डिज़्नी (Disney) और वायमो (Vymo) के ज़रिये, उन्हें B2C व B2B – दोनों तरह के प्रोडक्ट् और व्यवसाय का अनुभव है । हरी उस्मानिया विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग ग्रैजुएट हैं और ओरेकल (Oracle), सैमसंग (Samsung), एजिलेट (Agilet) एवं वायमो (Vymo) के साथ टेक्नोलॉजी के विभिन्न भागों पर काम कर चुके हैं ।

‘मंच’ ऐप के लांच के बाद टीम की समझ भी विकसित हो रही है | हर अपडेट के साथ ‘मंच’ ऐप भारतीयों को खुलकर चर्चा करने की दिशा में और करीब ले जाती है । यह सफर कुछ हद तक डाटा और कुछ हद तक उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को समझने की कला पर निर्भर करेगा |

प्रीतम और हरी की उपभोक्ताओं कि गहरी समझ, ऐप को सुधारते रहने की लगन और कुछ बड़ा बनाने की चाह से प्रभावित होकर हमने मंच ऐप में निवेश किया, और हम मंच टीम के साथ यह सफर तय करने के लिए उत्सुक हैं |

अगर आप भी कोई नया आईडिया लेकर एक बड़ी कंपनी बनाना चाहते हैं, तो हमें जरूर संपर्क करें |

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